labour day
मजदूरों और हड़तालों पर डॉ बाबा साहेब आंबेडकर और एम.के गांधी के क्या विचार थे ?
प्रथम विश्वयुद्ध के कारण कपड़ा उद्योग का धंधा काफी जोर में चल रहा था. मिल मालिक काफी अमीर समृद्ध होते जा रहे थे. लेकिन इस समृद्धि में मजदूरों की मजदूरी में प्रतिबिंबित नही हो रही थी,
काम अधिक और कम वेतन के कारण मजदूर वर्ग काफी तकलीफ में थे. अहमदाबाद के मिल मजदूर हड़ताल पर चले गए. मिल मालिक एसोसिएशन ने हड़ताल को कुचलने के लिए एम.के गांधी को बुलाया.
गांधी मिल मजदूरों की हड़ताल से काफी नाराज हुए. उन्होंने कहा मजदूरों को हड़ताल करने अधिकार नही है, ऐसा करके उन्होंने खुद का अपमान किया है. मैं मजदूरों का गुलाम होना नामंजूर करता हूँ !
गांधी पूरी तरह उद्योगपति समूह और मिल मालिकों के पक्ष में थे. उनके नजर में श्रमिकों को इतनी बुद्धि नही है कि वे मिल मालिकों को आदेश दे सकें. हो सकता कुछ मालिक गलत हो लेकिन इन्हें सुधारने के लिए मजदूरों को अधिक कष्ट भोगें, श्रम करें और अपने आकाओं का मन परिवर्तन करने में सफल होंगे !
डॉ बाबा साहेब आंबेडकर मजदूरों के पक्ष में खड़े हुए. उद्योगपति और मिल मालिकों द्वारा किया जा शोषण के खिलाफ आवाज उठाई. बाबा साहेब ने अपने विचारों से स्पष्ट कर मजदूरों का शोषण पीढ़ी दर पीढ़ी से ज़मींदार कर रहे हैं. अब शहरों में कुलीन वर्ग मजदूरों से दिन रात कमर तोड़ मेहनत कराकर उन्हें उनके श्रम का पूरा भुगतान नही करते.
आखिर क्यों एक मजदूर कुछ पैसों के लिए अपना पूरा जीवन ज़मींदार या मिल मालिकों के हवाले करे ?
जब बाबा साहेब गवर्नर जनरल की एग्जीक्यूटिव एक्सेक्युटिव कॉउंसिल के मेंबर बने तब उन्होंने नया कानून बनाया जिसके अनुसार काम का समय 14 घन्टे से 8 घन्टे प्रतिदिन किया !
कांग्रेस, मुस्लिम लीग, हिन्दू महासभा, आरएसएस और अन्य ब्राह्मण नेताओं ने बाबा साहेब के इस फ़ैसले का विरोध किया. कांग्रेस ने इस प्रस्ताव को नाकाम करने की बहुत कोशिश की !
डॉ बाबा साहेब आंबेडकर ने सभी बाधाओं को पार कर इस देश में मजदूरों को अधिकार और सम्मान दिलाया. लेकिन समाज उन धर्म गुरुओं और नेताओं बड़ा सम्मान देता हैं जो किसान मजदुर और श्रम विरोधी थे !
✍Kranti Kumar
✍Kranti Kumar
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